मंगलवार, 9 अप्रैल 2013

                       मछुआ है

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हवाए दिशा बदलती है, बदलने दो
सिर हमारा कटता है . कटने दो
रक्त जमी पर गिरता है, गिरने दो
"मछुआ" है, भावनाय न मरने दो .
जब चलेंगे टोली बनाकर पथ की ओर
थाम ही लेगा कोई लक्ष्य की डोर
पीढ़िया आश लगाय है, आशा न मिटने दो
मछुआ है,भावनाय न मरने दो
जो भय्क्रांत है, साहस का संचार कर दो
जो निर्जीव है, आत्मा का निर्माण कर दो
जो थक गए है.अब कदमो को चलने दो
मछुआ है , भावनाय न मरने दो
जब पैरो की थाप पड़ेगी.धरती दह्लेगी
जब कोटि हाथ उठेंगे. मूरत कह्केगी
दीये जलाओ सम्मान के.निषादराज को हसने दो
मछुआ है भावनाय न मरने दो




"सुरेश कुमार कश्यप"

सवालों के जवाब, रोकने की छमता है तो सफलता प्रतीक्षारत है


नेत्र्त्वकर्ता- आप एकजुट हो.
समाज का आदमी - क्यों हो ?
नेत्र्त्वकर्ता - आप एकजुट होंगे तो समाज में मजबूती आएगी.
समाज का आदमी - मजबूती से क्या होगा ?
नेत्र्त्वकर्ता -आप एकजुट होंगे तो कोई आपके अधिकारों का हनन नहीं कर सकेगा.आपका कोई शोषण नहीं कर सकेगा.
समाज का आदमी - में तो यहाँ किसी से नहीं डरता.मेरा तो अच्छा काम चल रहा है.
नेत्र्त्वकर्ता - आप तो खुशहाल है मगर आपके भाई बंधु आज भी बेगार का जीवन जी रहे है.
समाज का आदमी - जीने दो मुझे क्या पड़ी. मेहनत नहीं करते होंगे. मेने मेहनत की और सफल हू.
नेत्र्त्वकर्ता- क्या आपका अपने समाज के प्रति कुछ दायित्व नहीं बनता?
समाज का आदमी -कैसा समाज ?किसका समाज ?जब में भूखा मर रहा था क्या ये समाज मुझे रोटी देने आया था? जब में पैसे २ को तरस रहा था क्या आप या आपका समाज मुझे पैसे देने आया था? समाज की बात करते हो .आप क्यों समाज के पीछे पड़े हो. क्या लालच है आपको.अच्छा नेता बनना चाहते हो.कोई बात नहीं वोट आपको दे देंगे.
नेत्र्त्वकर्ता - जी नहीं में आपको समझाने आया हू.
समाज का आदमी -आपकी बाते अच्छी लगी. फिर मिलेंगे. अभी काम पर जाना है. कमाकर लायेंगे तो ही खाना मिलेगा नेताजी. काम पर नहीं जायेंगे तो आप या आपका समाज खिलाने नहीं आएगा. नमस्ते !
यह एक बानगी भर है.हमारे समाज में तो ऐसी ही प्रतिकिर्या मिलती है.इसका दोषी समाज का आदमी नहीं है.नेत्र्त्वकर्ता है.वे समाज के लोगो से भेंट करते है फिर उसकी तिलांजलि दे देते है.एक बार की मुलाकाते कोई मायने नहीं रखती. इससे तारतम्य में कमी आती है.जो लोग समाज को दिशा देना चाहते है उन्हें समाज के आदमी के प्रतयेक सवालों के जवाबो पर गहन अध्यन करना होगा. सटीकता उत्पन्न कंरनी होगी.उन्हें उस सम्मोहन शक्ति को पैदा करना होगा जो काम पर जाते समाज के आदमी को रोकने पर विवश कर दे.समाज के आदमी को विश्वास दिलाना होगा की जो किया जा रहा है वह आपके लिए है, निजी स्वार्थ के लिए नहीं. इसमे सभी गरीब- धनी का लाभार्थ है, किसी एक का नहीं. यह कर सके तो समाज आपका स्वागत करने के लिए तैयार खड़ा है. फिर आपको आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता है.